Tuesday, June 2, 2026

 माँ के घर की छत…

माँ के घर की टूटी छत कहती है,
थोड़ा जल्दी आना चाहिए था…
मेरी मरम्मत करवा लेनी चाहिए थी…
इसी छत के नीचे तुमने
पढ़ना सीखा,
हारकर भी हिम्मत न हारना सीखा…
माँ की रोटियाँ,
दादी की कहानियाँ,
पापा के रेडियो संग
सपने बुने…
आज तुम बड़े घरों में रहते हो,
ऊँची छतों के नीचे सोते हो…
पर याद रखना
मैं सिर्फ एक छत नहीं,
तुम्हारे बचपन की हिफाज़त हूँ,
तुम्हारे माता-पिता के सपनों की विरासत हूँ…
मुझे बचाओगे, तो तुम्हारे बच्चे सीखेंगे
जड़ें मजबूत हों,
तो ही पीढ़ियाँ ऊँची उड़ान भरती हैं
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A visit to the ancestral home of the in-laws stirred up many emotions.
We surely are a generation that is sinking low in values and rising high on the EGO-METRICS






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