रखो सब्र, अपने कर्म पर ध्यान दो,
थोड़ा काम वक्त को भी करने दो।
किसे क्या मिला, ये जानना तुम्हारा काम नहीं,
तुम्हारी मेहनत का फल तुमसे दूर नहीं।
दूसरों की ज़िंदगी में झाँकने से सिर्फ़ बेचैनी मिलती है,
अपनी मंज़िल पर नज़र रखो वक्त और कर्म,
दोनों कभी किसी के कर्ज़दार नहीं रहते।
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